Bhai Dooj 2025: इस साल कब है और तिलक का मुहूर्त।
4 October 2025 | vedic-culture
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इस साल 2025 में भाई दूज दोनों 26 October से लेकर 27 october तक बनाया जाएगा। Bhai Dooj एक ऐसा पवित्र रिश्ता है , जिसमे भाई अपने बहन के यहाँ जाता है और बहन उसको तिलक लगाती है। भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को समर्पित भाई दूज दीपावली के दो दिन बाद मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए तिलक करती हैं और भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं। इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है क्योंकि यमराज ने इसी दिन अपनी बहन यमुनाजी से मिलकर उन्हें वरदान दिया था कि इस तिथि को बहन के हाथों से तिलक करवाने वाला भाई दीर्घायु होगा। आइये जानते है भाई दूज के मुहूर्त और बहुत चीज़ों के बारे में।
Bhai Dooj Muhurat क्या है 2025 में ?
हिन्दू धर्म में खासकर त्योहारों में मुहूर्त को बहुत माना जाता है। इस बार, Bhai Dooj 2025 Muhurat की बात करें तो 26 अक्टूबर को अपराह्नकाल यानी दोपहर 02:43 (14:43) के बाद यह समय अत्यंत शुभ रहेगा। इस समय भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने और भाई की लंबी उम्र तथा सुख-समृद्धि के लिए तिलक करने का कार्य किया जा सकता है। हालांकि देष काल के अनुसार यदि उदयातिथि को महत्व दिया जाए, तो भाई दूज 27 अक्टूबर को भी मनाया जा सकता है। इस स्थिति में यह ध्यान रखें कि द्वितिया तिथि 12:46 तक समाप्त हो रही है, इसलिए इस समय से पहले पूजा अवश्य कर लें। सही मुहूर्त जानने के लिए आप हमारे वेबसाइट का Shubh Muhurat Finder का उपयोग कर सकते हैं।
भाई दूज के पीछे क्या कहानी है ?
यमराज और यमुना जी की कहानी
भाई दूज का उत्सव भारत में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को समर्पित है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए उन्हें तिलक करती हैं और भेंट देती हैं। भाई दूज के उत्सव के पीछे कई पौराणिक कहानियाँ जुड़ी हुई हैं। एक प्रमुख कथा यमराज और यमुनाजी से जुड़ी है। माना जाता है कि यमराज अपनी बहन यमुनाजी के घर उनके तिलक और भव्य भोजन करने के बाद लौटते थे। इस दिन को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। इसके अनुसार बहनें अपने भाई के लिए यमराज की तरह उनके कल्याण और सुरक्षा की कामना करती हैं। दूसरी कथा महाभारत से जुड़ी है, जिसमें पांडवों के समय में द्रौपदी ने अपने भाइयों की रक्षा के लिए विशेष रूप से यह पर्व मनाया था। भाई दूज केवल पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का दिन नहीं बल्कि समाज में भाई-बहन के बीच प्रेम, सम्मान और एकता का प्रतीक भी है।
लक्ष्मी जी से क्या सम्बन्ध है भाई दूज से ?
इसके अलावा, भाई दूज का संबंध लक्ष्मी और धन के प्रतीक के रूप में भी माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और सफलता के लिए विशेष रूप से उपवास रखती हैं और उनका मंगलकामना करती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में भाई दूज मनाने के तरीके में भिन्नता देखने को मिलती है। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में इसे भाई बीज कहा जाता है, जबकि उत्तर भारत में इसे यम द्वितीया के रूप में मनाया जाता है। उत्तर भारत में बहनें अपने भाई के हाथ में तिलक करती हैं और भाई उन्हें उपहार देते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि भाई दूज के दिन किया गया तिलक और भाई का दिया गया वचन जीवनभर भाई को सुरक्षित और संपन्न बनाता है। यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते को सजीव रखने, पारिवारिक बंधन को मजबूत करने और संस्कृति एवं परंपरा के महत्व को समझने का अवसर प्रदान करता है।
भाई दूज पर क्या करना चाहिए?
भाई दूज पर बहनें और भाई कुछ विशेष परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन करते हैं। यह दिन केवल एक अनुष्ठान नहीं बल्कि परिवार को जोड़ने का अवसर है।
- बहनें भाई को तिलक करें:
बहनें भाई के माथे पर रोली, चावल और हल्दी का तिलक लगाती हैं। इसके बाद आरती कर मिठाई खिलाती हैं।
- भाई बहन को उपहार दे:
भाई अपनी बहनों को वस्त्र, आभूषण या पैसे देते हैं। यह बहन के प्रति सम्मान और स्नेह का प्रतीक है।
- भोजन का महत्व:
बहनें भाई को अपने हाथों से भोजन कराती हैं। इसे ‘भोज करवाना’ बहुत शुभ माना जाता है।
- यमुनाजी स्नान:
कई स्थानों पर इस दिन यमुना नदी में स्नान करना पवित्र माना गया है, क्योंकि यह यमराज और यमुनाजी की कथा से जुड़ा है।
- दान-पुण्य:
जरूरतमंदों को दान करना इस दिन बेहद शुभ होता है। इससे जीवन में समृद्धि आती है।
भाई दूज पर क्या नहीं करना चाहिए?
हर शुभ पर्व की तरह भाई दूज पर भी कुछ वर्जनाएं बताई गई हैं। इन्हें मानने से त्योहार का फल पूर्ण रूप से प्राप्त होता है।
- भाई-बहन का घर से बाहर न रहना:
इस दिन भाई-बहन को यात्रा नहीं करनी चाहिए। माना जाता है कि इससे उनके रिश्ते में दूरी आ सकती है।
- तिलक से पहले भोजन न करें:
भाई को तिलक और आरती से पहले भोजन नहीं करना चाहिए। पूजा के बाद ही अन्न ग्रहण करना शुभ है।
- झगड़ा या विवाद न करें:
भाई दूज के दिन भाई-बहन के बीच कोई कटुता या बहस नहीं होनी चाहिए। यह अशुभ माना जाता है।
- अंधेरे में तिलक न करें:
तिलक व पूजा का कार्य दिन के समय ही करना चाहिए, रात्रि में नहीं।
- अशुद्धता में पूजा न करें:
बहन या भाई को अशुद्ध अवस्था (स्नान के बिना) पूजा नहीं करनी चाहिए।
Bhai Dooj 2025 भारतीय संस्कृति का वह पर्व है जो भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत बनाता है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि भावनाओं का संगम है। बहनें भाई के जीवन की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, वहीं भाई भी बहन की रक्षा और सम्मान का संकल्प लेते हैं।
- सांस्कृतिक महत्व:
यह पर्व परिवार को एकजुट रखने और रिश्तों को मजबूत करने का अवसर है।
- धार्मिक दृष्टि से:
भाई दूज को यम द्वितीया कहा जाता है, इसलिए इसका महत्व और बढ़ जाता है।
- आधुनिक सन्देश:
बदलते समय में भी भाई दूज की परंपराएं हमें रिश्तों में प्रेम, सम्मान और सुरक्षा का महत्व याद दिलाती हैं।
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Frequently Asked Questions
1. भाई दूज 2025 कब है?
भाई दूज 2025 26 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
2. भाई दूज 2025 मुहूर्त क्या है?
भाई दूज मुहूर्त 2025 में दोपहर 02:43 बजे (14:43) से शुभ समय शुरू होगा।
3. भाई दूज क्यों मनाया जाता है?
यह पर्व भाई-बहन के प्रेम और भाई की लंबी उम्र के लिए मनाया जाता है।
4. भाई दूज पर क्या परंपराएं हैं?
बहन भाई के माथे पर तिलक करती हैं और भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं।
5. भाई दूज मनाने की खास तैयारी क्या होती है?
साफ-सुथरे कपड़े पहनना, मिठाई तैयार करना और घर को सजाना मुख्य तैयारी है।
By Manjeet Kumar
Vedic Meet Content Team
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