Navratri 2025: मां दुर्गा पूजा, विधि और मुहूर्त
12 September 2025 | vedic-culture
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Navratri 2025 आने वाला है और यह भारत के सबसे बड़े पर्व यानि महापर्व के श्रेणी में आता है। वैसे नवरात्री साल में दो बार मनाया जाता है - एक चैत्र नवरात्री और दूसरा है शारदीय नवरात्री। तो यह है शारदीय नवरात्री, जिसमे माँ दुर्गा के 9 रूपों की विधिपूर्वक पूजन होती है। इन दिनों में एक भक्त उपवास रखता है , कलश रखता है और माँ से शक्ति , सफलता मांगते हैं। तो आज के इस ब्लॉग में जानेंगे माँ दुर्गा का पूजा , विधि और मुहूर्त।
Navratri Puja Muhurat 2025
वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 22 सितंबर 2025 को रात 01:23 बजे होगी और इसका समापन 23 सितंबर 2025 को रात 02:55 बजे होगा।
इसी दिन से शारदीय नवरात्र प्रारंभ होंगे और 22 सितंबर को घटस्थापना की जाएगी।
दुर्गा अष्टमी 2025 (Durga Ashtami 2025 Date and Shubh Muhurat)
- इस बार 30 सितंबर 2025 को दुर्गा अष्टमी (Durga Puja 2025) मनाई जाएगी।
- इसी दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व रहेगा।
अष्टमी तिथि प्रारंभ – 29 सितंबर 2025, शाम 04:31 बजे
अष्टमी तिथि समापन – 30 सितंबर 2025, शाम 06:06 बजे
महानवमी 2025 (Mahanavami 2025 Date and Shubh Muhurat)
- इस बार 01 अक्टूबर 2025 को महानवमी (Navami 2025) का पर्व मनाया जाएगा।
- इस दिन भी विधिपूर्वक कन्या पूजन किया जाएगा।
नवमी तिथि प्रारंभ – 30 सितंबर 2025, शाम 06:06 बजे
नवमी तिथि समापन – 01 अक्टूबर 2025, रात 07:01 बजे
इस प्रकार शारदीय नवरात्रि 2025 का शुभारंभ 22 सितंबर से होगा और इसका विशेष महत्व 30 सितंबर की दुर्गा अष्टमी और 01 अक्टूबर की महानवमी पर रहेगा।
Navratri Puja Vidhi
सही विधि से पूजा करने से माँ दुर्गा प्रसन्न होती हैं।
- स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें।
- घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में पूजा स्थल बनाएं।
- मिट्टी के पात्र में जौ बोकर उस पर जल से भरा कलश रखें।
- कलश के ऊपर आम के पत्ते रखें और नारियल रखें।
- माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- दीपक, धूप, फूल, नैवेद्य और चुनरी अर्पित करें।
- "ॐ दुं दुर्गायै नमः" मंत्र का जप करें।
- दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या स्तुति का पाठ करें।
- अखंड ज्योति जलाना शुभ माना जाता है।
यह संपूर्ण प्रक्रिया ही Navratri Puja Vidhi कहलाती है।
नवरात्रि के 9 दिन और 9 देवियाँ
माँ शैलपुत्री (Day 1)
नवरात्रि की प्रथम देवी माँ शैलपुत्री हैं। "शैल" का अर्थ है पर्वत और "पुत्री" का अर्थ है बेटी। इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। यह शांति और स्थिरता का प्रतीक हैं। इनका वाहन वृषभ (बैल) है और इनको घी का भोग लगाया जाता है। पूजा में सबसे पहले कलश स्थापना की जाती है, फिर माँ को सफेद फूल अर्पित कर धूप-दीप जलाकर शांति और सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
माँ ब्रह्मचारिणी (Day 2)
दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। "ब्रह्म" का अर्थ है तपस्या और "चारिणी" का अर्थ है आचरण करने वाली। यह तप, त्याग और संयम का प्रतीक हैं। इनका वाहन कमल पुष्प है और भोग में गुड़ तथा शक्कर अर्पित की जाती है। पूजा के समय माँ को सफेद या पीले रंग के फूल चढ़ाए जाते हैं। श्रद्धालु इन्हें धूप, दीप और अक्षत से पूजते हुए ज्ञान और धैर्य की प्राप्ति की कामना करते हैं।
माँ चंद्रघंटा (Day 3)
तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की आराधना होती है। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटी होने से इनका नाम "चंद्रघंटा" पड़ा। यह साहस और वीरता का प्रतीक हैं। इनका वाहन सिंह है और भोग में दूध व खीर अर्पित की जाती है। पूजा में भक्त माँ को सुनहरे और लाल फूल चढ़ाते हैं तथा उनसे भय और संकट से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।
माँ कुष्मांडा (Day 4)
चौथे दिन माँ कुष्मांडा की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इन्होंने अपनी दिव्य मुस्कान से सृष्टि की रचना की थी। यह ऊर्जा और सृजन शक्ति की प्रतीक हैं। इनका वाहन सिंह है और भोग में मालपुआ अर्पित किया जाता है। पूजा में हरे पत्तों और फूलों का प्रयोग शुभ माना जाता है। श्रद्धालु माँ से दीर्घायु और स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
माँ स्कंदमाता (Day 5)
पांचवें दिन माँ स्कंदमाता की आराधना होती है। यह भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। इनका वाहन सिंह है और गोद में स्कंद को धारण किए हुए रहती हैं। यह मातृत्व और करुणा की प्रतीक हैं। भोग में केले अर्पित किए जाते हैं। पूजा में पीले फूल और धूप-दीप जलाकर परिवार की सुख-शांति की कामना की जाती है।
माँ कात्यायनी (Day 6)
छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है। इन्हें शक्ति का उग्र रूप माना जाता है और इनका वाहन सिंह है। यह साहस और विजय की प्रतीक हैं। भोग में शहद अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु लाल फूल चढ़ाकर विवाह, प्रेम और जीवन में सफलता की प्रार्थना करते हैं।
माँ कालरात्रि (Day 7)
सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा होती है। यह देवी का सबसे उग्र स्वरूप है। इनका वाहन गधा है और इनका रूप अंधकारमय है, लेकिन यह भक्तों को भय और बुराई से मुक्त करती हैं। भोग में गुड़ और मिठाई अर्पित की जाती है। पूजा में नीले या काले फूल अर्पित कर संकट से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
माँ महागौरी (Day 8)
आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा होती है। इनका रूप अत्यंत श्वेत और कोमल है। यह शांति और सौंदर्य की प्रतीक हैं। इनका वाहन बैल है और भोग में नारियल अर्पित किया जाता है। पूजा में सफेद फूल और वस्त्र चढ़ाए जाते हैं। भक्त माँ से पवित्रता, समृद्धि और सौभाग्य की कामना करते हैं।
माँ सिद्धिदात्री (Day 9)
नवरात्रि के अंतिम दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। यह सिद्धियों और ज्ञान की देवी हैं। इनका वाहन सिंह है और भोग में फल अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु माँ को लाल फूल, धूप-दीप अर्पित करते हैं और जीवन में सफलता, सिद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करते हैं।
नवरात्रि में पालन करने योग्य नियम
- सात्त्विक भोजन करें और व्रत रखें।
- दिन में एक बार फलाहार करना शुभ है।
- मांसाहार, मदिरा और नशे से दूर रहें।
- झूठ, क्रोध और बुरे विचारों से बचें।
- हर दिन आरती और मंत्रजाप करें।
Navratri Maa Durga Puja का लाभ
- घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
- मानसिक शांति और आत्मविश्वास मिलता है।
- व्यापार और करियर में प्रगति होती है।
- विवाह और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
- शत्रु और बाधाएँ समाप्त होती हैं।
नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि आत्मिक शुद्धि, साधना और शक्ति का महापर्व है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा कर भक्त न केवल भौतिक सुख-सुविधाएँ प्राप्त करते हैं बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति भी हासिल करते हैं। सही विधि, नियम और श्रद्धा से की गई Navratri Maa Durga Puja से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, परिवार में प्रेम और एकता बढ़ती है और जीवन में सफलता के नए द्वार खुलते हैं। यही कारण है कि नवरात्रि को शक्ति की उपासना का सबसे श्रेष्ठ समय माना गया है।
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FAQs (frequently asked questions)
Q1. Navratri Maa Durga Puja क्यों की जाती है?
Navratri Maa Durga Puja ,नौ स्वरूपों को प्रसन्न करने और जीवन से नकारात्मकता दूर करने के लिए।
Q2. Navratri Puja Muhurat का महत्व क्या है?
Navratri Puja Muhurat पर पूजा करने से फल अधिक मिलता है और माँ हमेशा कृपा बनाये रखती है।
Q3. Navratri Puja Vidhi में सबसे महत्वपूर्ण क्या है?
कलश स्थापना, अखंड ज्योति और नौ दिनों तक देवी पूजा।
Q4. क्या व्रत रखना अनिवार्य है?
अनिवार्य नहीं है, लेकिन सात्त्विक आहार और संयम रखना शुभ है।
Q5. अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन क्यों किया जाता है?
कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है, इससे पूजा पूर्ण होती है।
By Manjeet Kumar
Vedic Meet Content Team
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