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Vedic Culture

पढ़े Bhagavad Gita Quotes in Hindi आज ही।

Short answer

भावनाओं को समझें और जीवन को बदलें इन प्रेरणादायक bhagavad gita quotes in hindi के साथ। अर्थ सहित श्लोक पढ़ें और जीवन में शांति पाएं।

जीवन में खोना और पाना लगा रहता है  . पर इन सब से हमें होता है अवसाद , अकेलापन और भी बहुत कुछ।  ऐसे में हमें क्या करना चाहिए।  तो आइये आपको ले चलते है एक अच्छे से समाधान की ओर।  जी में बात कर रहा हूँ भगवद गीता की।  और आपके लिए सबसे अच्छी बात यह है की इस ब्लॉग में bhagavad gita quotes in hindi है , जो आपको श्लोक को समझने में आसानी होगा। तो आइये इस ब्लॉग के मदद से भगवद गीता को अपनाते है। 


जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च।

तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि॥ 2 -27 " 


"हे पार्थ! जो जन्मा है उसकी मृत्यु निश्चित है, इसलिए जो होना तय है, उस पर शोक मत करो।"


यह उपदेश श्रीकृष्ण ने युद्ध में विचलित अर्जुन को दिया था। उसी ज्ञान से प्रेरित होकर, इस ब्लॉग में हम कुछ चुनिंदा भगवद गीता के उद्धरण हिंदी में जानेंगे।


भगवद गीता क्या है ?


भगवद गीता, हिंदू धर्म का प्रमुख ग्रंथ है जो मानव जीवन के महत्वपूर्ण सवालों का समाधान करता है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को धर्म और कर्म के विषय में उपदेश दिया गया है। इन सब उपदेशों को एक किताब में साथ डाल के भगवद गीता बनाया गया है।  तो आइये  आज bhagavad gita quotes hindi में जानते है और अपने ज़िन्दगी को अच्छे रास्ते पे लाते हैं। 


bhagavad gita quotes


कुछ महत्वपूर्ण bhagavad gita quotes उनके अर्थ के साथ : 


आत्मा क्या है , जाने गीता से। 


नैनं छिद्रन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक: ।न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत ॥

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 23)


अर्थ: 

आत्मा अमर है — न इसे मारा जा सकता है, न जलाया। जैसे ऊर्जा एक शरीर से दूसरे में जाती है, वैसे ही आत्मा भी। हे अर्जुन, धर्म के मार्ग पर तुम केवल शरीर का नाश कर रहे हो, आत्मा नहीं। इसलिए चिंता छोड़ो और अपना कर्तव्य निभाओ।


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कर्म ही पूजा है , जाने इस श्लोक से क्यों ?


कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 47)


अर्थ: कृष्ण जी कहते हैं कि व्यक्ति को फल की चिंता किए बिना अपना कर्तव्य निभाना चाहिए। फल की सोच आशा से जोड़ती है, और आशा से नकारात्मकता शुरू होती है। बिना अपेक्षा के कर्म करने से काम अच्छे से होता है।


लगाव है हानिकारक ! जाने इस श्लोक से क्यों 


ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते। सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥

   (द्वितीय अध्याय, श्लोक 62)


अर्थ: जब हम प्यार और परिणाम की उम्मीद करते हैं, तो हम दूसरों के अनुसार जीने लगते हैं। उम्मीदें टूटने पर हम निराश हो जाते हैं। जब हम भावनाओं से प्रभावित नहीं होते, तो अपने कर्तव्यों को बेहतर तरीके से निभा पाते हैं।


क्रोध से होता है विनाश , यह कहता है गीता। 


क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:। स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 63)


अर्थ:  क्रोध, लोभ, और वासना जैसी भावनाएँ मनुष्य को भ्रमित करती हैं, जिससे वह गलत निर्णय लेने लगता है। भगवान कृष्ण कहते हैं कि जब हम ज्ञान से दूर होते हैं, तो मूर्खतापूर्ण काम करने लगते हैं, इसलिए हमें अपने दिमाग को नियंत्रित रखना चाहिए।


गुरु श्रेष्ठ है , ऐसा क्यों जाने इस श्लोक से। 


यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जन:।स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥

(तृतीय अध्याय, श्लोक 21)


अर्थ: सही गुरु का चयन महत्वपूर्ण है, क्योंकि गलत गुरु से जीवन में गिरावट और सही गुरु से सकारात्मक बदलाव होता है। हमें हमेशा ज्ञानी और बुद्धिमान लोगों के साथ रहना चाहिए।


अवतार क्यों होते है , जाने इस श्लोक से। 


यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥

(चतुर्थ अध्याय, श्लोक 7)


अर्थ: भगवान कृष्ण ने कहा कि जब अधर्म फैलेगा, तो वह अवतार लेकर धर्म की पुनः स्थापना करेंगे। एक योद्धा का कर्तव्य है बलिदान देना, क्योंकि शहादत उसे सम्मान और प्रेरणा देती है।

हतो वा प्राप्यसि स्वर्गम्, जित्वा वा भोक्ष्यसे महिम्। तस्मात् उत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय:॥(द्वितीय अध्याय, श्लोक 37)


योद्धा के कर्तव्य , जाने गीता से। 


अर्थ: आवश्यकता पड़ने पर बलिदान देना एक योद्धा का कर्तव्य है, क्योंकि शहादत एक योद्धा के लिए माला के समान होती है। यदि आप युद्ध के दौरान शहीद हो जाते हैं तो लोग आपके नक्शेकदम पर चलते हुए आपको सम्मानजनक विदाई देते हैं। यदि आप जंग जीत गए तो युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे।


हर युग में थे कृष्ण जी, पर कैसे ?


परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे-युगे॥

(चतुर्थ अध्याय, श्लोक 8).


अर्थ: भगवान कृष्ण ने कहा है कि मैंने हर युग में जन्म लिया है और जब भी अधर्म धर्म पर हावी हो जाएगा और दिव्य लोगों की रक्षा करूंगा, तब भी मैं ऐसा करता रहूंगा।


मोक्ष कैसे मिलेगा, इसका जवाब देगा यह श्लोक।

श्रद्धावान्ल्लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रिय:। ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति॥

 (चतुर्थ अध्याय, श्लोक 39)


अर्थ: हे अर्जुन, जो मनुष्य ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखता है और ज्ञान प्राप्त कर कल्याण करता रहता है, वह सदैव सुखी रहता है और शीघ्र ही मोक्ष प्राप्त कर लेता है।



सच्चाई के साथ हमेशा खड़े रहिये , यह श्लोक कहता है। 


उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्। आत्मैव ह्रात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मन:॥

(षष्ठ अध्याय, श्लोक 5)


अर्थ: हमेशा सच्चाई के साथ खड़े रहें और अपना सर्वश्रेष्ठ कार्य करें। झूठ से दूर रहें और हर वक्त भगवान का स्मरण करें। अपने आप को कभी भी पतन में मत डालो। मनुष्य स्वयं ही अपना मित्र और शत्रु होता है।


साधारण पूजा से मिलता है फल, यह कहता है गीता।  


पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति। तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मन:॥

(नवम अध्याय, श्लोक 26)


अर्थ: जब आप भगवान की पूजा करते हैं तो उसमें भक्ति होनी चाहिए। यदि कोई साधारण फूल या कोई अन्य भोजन अर्पित करता है, तो मैं उसे पूरी श्रद्धा से अर्पित करने पर स्वीकार कर लूंगा। प्रसाद दिखावा नहीं होना चाहिए। सच्ची भक्ति मुझे बांध सकती है।


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धर्मात्मा कौन है , जाने गीता से। 


यं हि न व्यथयन्त्येते पुरुषं पुरुषर्षभ | समदु:खसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते ||

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 15 )


अर्थ: हे अर्जुन, जो व्यक्ति भावनाओं से रहित होकर सुख और दुख को समान भाव से देखता है, वही धर्मात्मा है। जिस व्यक्ति में भावनाओं पर नियंत्रण रखने का गुण होता है, उसे एक दिन मोक्ष की प्राप्ति अवश्य होती है।


किसके शरण में जाना चाहिए , जाने गीता से। 


सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच:॥

(अष्टादश अध्याय, श्लोक 66)


अर्थ: सभी धर्मों को त्यागकर मेरी शरण में आ जाओ मैं तुम्हारा कल्याण करूंगा। जो कोई मेरी शरण में आएगा, उसे शीघ्र ही सांत्वना मिलेगी।


आत्म -नियंत्रण है जरूरी , जाने गीता से। 


असक्तबुद्धि: सर्वत्र जितात्मा विगतस्पृह: | 

नैष्कर्म्यसिद्धिं परमां सन्न्यासेनाधिगच्छति ||

(अष्टादश अध्याय श्लोक 49)


अर्थ: हे अर्जुन, जो आत्म-नियंत्रण में अच्छा है और किसी भी प्रकार की भौतिकवादी चीजों से दूर रहता है, और कर्म के फल से मुक्त है, तो वह मोक्ष के योग्य है और वैकुंठ धाम को जाएगा।


आत्मसंयम है जरूरी , जाने गीता से। 


असक्तबुद्धि: सर्वत्र जितात्मा विगतस्पृह: | नैष्कर्म्यसिद्धिं परमां सन्न्यासेनाधिगच्छति ||

(अष्टादश अध्याय श्लोक 49)


अर्थ: हे अर्जुन, जो आत्मसंयम में कुशल है और किसी भी प्रकार की भौतिकवादी चीजों से दूर रहता है, और कर्म के फल से मुक्त है, वह मोक्ष के योग्य है और वैकुंठ में जाएगा। वह एक सर्वोच्च व्यक्ति हैं.


जल्दी मोक्ष की होगी प्राप्ति , जाने गीता से। 


यं हि न व्यथयन्त्येते पुरुषं पुरुषर्षभ | समदु:खसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते ||

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 15 )


अर्थ: हे अर्जुन, जिस किसी भी व्यक्ति में अचल रहकर जीवन और दुख से मुक्त होकर जीवन जीने की शक्ति है, उसे निश्चित ही मोक्ष की प्राप्ति होगी।


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जीवन के यह दो सत्य , जाने गीता से। 


जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च |तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि ||

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 27 )


अर्थ: जीवन के दो सत्य हैं, एक जन्म और दूसरा मृत्यु। यदि कोई व्यक्ति मृत्यु और जन्म से जुड़ जाता है तो वह विनाश के मार्ग की ओर बढ़ जाता है। केवल एक ही चीज़ है जो आप कर सकते हैं, वह है अपने काम पर नियंत्रण रखना और अपने कर्तव्यों को अच्छी तरह से निभाना।


ज्यादा ज्ञान होता है हानिकारक , क्यों ? 


यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन | ज्ञानाग्नि: सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा ||

(चतुर्थ अध्याय, श्लोक 37 )


अर्थ: जब इंजन में बहुत अधिक ज्वलन हो तो पूरी गाड़ी जल सकती है। जब आप अत्यधिक ज्ञानी बन जाते हैं, तो ज्ञान की रोशनी दुनिया की हर भौतिक वस्तु को जला सकती है।


मन को नियंत्रण क्यों करे , जाने गीता से। 


बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जित: |अनात्मनस्तु शत्रुत्वे वर्ते तात्मैव शत्रुवत् || 

(षष्ठ अध्याय, श्लोक 6 )


अर्थ: मन एक बेकाबू घोड़े की तरह है, जो बिना नियंत्रण के भटकता रहता है। एक समझदार व्यक्ति को इसे नियंत्रित करने की क्षमता होनी चाहिए, क्योंकि इससे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।


ये अनमोल भगवद गीता की शिक्षाएं आपको जीवन जीने और जीवन की समस्याओं का सामना करने में मदद कर सकती हैं। अगर आप सचमुच जीवन की समस्याओं से निपटना चाहते हैं तो आज से ही भगवत गीता पढ़ना शुरू कर दें। अगर आप bhagavad gita quotes हिंदी में पढ़ते है तो आपको श्लोक का सही अर्थ समझ में आता है और आप जीवन में आगे बढ़ते हैं। 


FAQs:


गीता का कौन सा उपदेश आत्माओं के बारे में बताता है?


"नैनं छिद्रन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक: ।
नैनं चैनं क्लेदयन्त्यपो न शोषयति मारुत् ॥"
(दिव्य अध्याय, श्लोक 23)


यह उपदेश आत्माओं के बारे में है। आत्माएं नष्ट नहीं की जा सकतीं लेकिन वे ऊर्जा का एक स्रोत हैं जो एक शरीर से दूसरे शरीर में स्थानांतरित होती रहती हैं।


महाभारत के दौरान भगवद गीता को किसने सुना?


अर्जुन के साथ-साथ भगवान हनुमान, संजय और भगवान बर्बरीक भी भगवद गीता के श्रोता थे।


मन पर नियंत्रण के बारे में कृष्ण जी क्या कहते हैं?


“बंधुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जित: |
अनात्मनस्तु शत्रुत्वे वर्ते तत्तमैव शत्रुवत् || “

(षष्ठ अध्याय, श्लोक 6)


मन एक अनछुए घोड़े की तरह है जो दिशाहीन दौड़ता है और बिना उद्देश्य के भटकता रहता है। जब एक समझदार व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित करने में सक्षम हो जाता है तो बदले में मन उसे किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त शक्ति प्रदान करता है।


Manjeet Kumar

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