नाग पंचमी 2026: तिथि, पूजा विधि, महत्व और उपाय

22 July 2026 | vedic-culture

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Naag Panchami 2026

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Naag Panchami 2026 क्या है?


Naag Panchami 2026, का पावन पर्व 17 अगस्त 2026 (सोमवार) को मनाया जाएगा।  हिन्दू पंचांग के अनुसार यह पर्व हमेशा श्रावण (सावन) मास  के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आती है। वही नाग पंचमी 2026 के दिन नाग देवता और भगवान शिव की पूजा करने से सुख - समृद्धि, परिवार की रक्षा और सर्प भय से आपको मुक्ति भी मिलती है और यह शिव जी से मिलती है क्यूंकि उनके गले में वासुकि नाग मिलता है तो इस ब्लॉग में आप जानेगे नाग पंचमी कब है, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका महत्व क्या है? यह सब आपको इस ब्लॉग में मिलेगा। 


नाग पंचमी 2026 कब है?


नाग पंचमी, हिन्दू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसमे नाग देवताओं की पूजा की जाती है। यह एक ऐसा दिन है जब दिन की प्रकृति, जीव-जंतुओं और पर्यावरण के प्रति एक सम्मान का संदेश देता है। वही भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र ,कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु सहित कई राज्यों में यह पर्व विशेष श्रद्धा से मनाया जाता है। नाग पंचमी 2026 मनाने से आपके अंदर सांपो का भय, और साथ में शिव की कृपा भी प्राप्त होती है। 

विवरण

जानकारी

Nag Panchami 2026 Date

17 अगस्त 2026 (सोमवार)

पंचमी तिथि प्रारंभ

16 अगस्त 2026, शाम 04:52 बजे

पंचमी तिथि समाप्त

17 अगस्त 2026, शाम 05:00 बजे

हिंदू मास

श्रावण (सावन) शुक्ल पक्ष पंचमी

Naag Panchami 2026 शुभ मुहूर्त


नाग पंचमी 2026 पूजा समय जानने के लिए नीचे टेबल को जरूर पढ़े। 

मुहूर्त

समय

नाग पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त

17 अगस्त 2026, सुबह 05:51 बजे से 08:29 बजे तक

ब्रह्म मुहूर्त

प्रातः लगभग 04:20 बजे से 05:05 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त

दोपहर लगभग 11:57 बजे से 12:49 बजे तक

नाग पंचमी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व


नाग पंचमी का हमारे जीवन में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह पर्व हमें प्रकृति के प्रत्येक जीव के महत्व को समझने की प्रेरणा देता है। सांप भले ही विषैले हों, लेकिन वे पर्यावरण के संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे चूहों और अन्य छोटे जीवों की संख्या नियंत्रित करके खेती और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करते हैं। इसके अलावा, सांप के विष में पाए जाने वाले कुछ तत्वों का उपयोग वैज्ञानिक विभिन्न दवाओं और चिकित्सा अनुसंधान में करते हैं। इसलिए, सांपों का संरक्षण जैव विविधता और स्वस्थ पर्यावरण के लिए आवश्यक है। 


  • भगवान शिव और नाग – शिवजी के गले में विराजमान नाग शक्ति, निर्भयता और प्रकृति के संतुलन का प्रतीक हैं।
  • भगवान विष्णु एवं शेषनाग – शेषनाग पर भगवान विष्णु का शयन सृष्टि की स्थिरता और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।
  • श्रीकृष्ण और कालिय नाग कथा भगवान श्रीकृष्ण और कालिय नाग की कथा केवल बुराई पर अच्छाई की विजय ही नहीं, बल्कि धर्म, करुणा और प्रकृति के प्रति सम्मान का भी संदेश देती है।
  • नाग देवता का प्रतीकात्मक महत्व – नाग देवता सुरक्षा, उर्वरता, वर्षा, ऊर्जा और कुंडलिनी शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं।


Naag Panchami 2026 पूजा विधि (Step-by-Step)


नाग देवता की पूजा कैसे करें? नीचे दी गई नाग पंचमी पूजा विधि का पालन करें:


  1. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
  2. घर के पूजा स्थान या मुख्य द्वार पर गोबर या मिट्टी से नाग देवता का चित्र बनाएं।
  3. नाग पंचमी पूजा सामग्री जैसे हल्दी, रोली, अक्षत, फूल, दीपक, धूप, दूध और जल अर्पित करें।
  4. भगवान शिव का जलाभिषेक या रुद्राभिषेक करें।
  5. नाग पंचमी मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें: ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नागः प्रचोदयात्
  6. अंत में आरती करें और नाग पंचमी व्रत कथा सुनें।


नाग पंचमी व्रत कथा


मुख्य कथा: प्राचीन मान्यता के अनुसार एक किसान ने खेत जोतते समय अनजाने में नाग के बच्चों को हानि पहुँचा दी। नागिन क्रोधित हुई, लेकिन किसान की बेटी ने श्रद्धा से नाग देवता की पूजा की। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर नागिन ने पूरे परिवार को क्षमा कर दिया और आशीर्वाद दिया।

धार्मिक संदेश: सभी जीवों के प्रति दया, करुणा और सम्मान रखना चाहिए।

आध्यात्मिक सीख: सच्ची श्रद्धा, अहिंसा और प्रकृति के संरक्षण से जीवन में सुख एवं शांति आती है।


नाग पंचमी पर क्या करें?


  • भगवान शिव और नाग देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
  • सात्विक भोजन करें और व्रत रखें।
  • गरीबों को अन्न, वस्त्र या दान दें।
  • रुद्राभिषेक और शिव मंत्रों का जाप करें।
  • पर्यावरण और जीव-जंतुओं की रक्षा का संकल्प लें।


नाग पंचमी पर क्या नहीं करना चाहिए?


  • जमीन की खुदाई या खुदाई संबंधी कार्य न करें।
  • किसी भी जीव या सर्प को नुकसान न पहुँचाएं।
  • मांस, शराब और तामसिक भोजन से बचें।
  • क्रोध, झूठ और अपशब्दों से दूर रहें।
  • जीवित साँपों को पकड़कर या परेशान करके पूजा न करें।


नाग पंचमी के दिन किए जाने वाले विशेष उपाय


  • राहु-केतु और कालसर्प दोष की शांति के लिए भगवान शिव का रुद्राभिषेक करें।
  • "ॐ नमः शिवाय" और नाग पंचमी मंत्र का जाप करें।
  • नाग देवता को हल्दी, फूल और जल अर्पित करें।
  • गरीबों को भोजन और दान दें।


नाग पंचमी और ज्योतिषीय महत्व


ज्योतिष के अनुसार, नाग पंचमी 2026 के दिन शिव पूजा, रुद्राभिषेक और नाग देवता की आराधना करने से राहु-केतु के अशुभ प्रभाव कम होने तथा कालसर्प दोष की शांति मिलने की मान्यता है। हालांकि इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली और व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करता है।


भारत में नाग पंचमी कैसे मनाई जाती है?


  • उत्तर भारत: शिव मंदिरों में विशेष पूजा, व्रत और कथा का आयोजन होता है।
  • महाराष्ट्र: नाग मंदिरों में श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन करते हैं और नाग देवता की पूजा विधि विधान से करते है।
  • कर्नाटक: पारंपरिक पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
  • गुजरात: नाग देवता की पूजा के साथ दान-पुण्य का विशेष महत्व रहता है।
  • दक्षिण भारत: मंदिरों में विशेष अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।


निष्कर्ष


नाग पंचमी केवल नाग देवता की पूजा का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, जीव-जंतुओं और पर्यावरण के प्रति सम्मान का संदेश देने वाला पावन उत्सव है। 17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी 2026 शुभ मुहूर्त में श्रद्धापूर्वक पूजा, नाग पंचमी पूजा विधि का पालन और भगवान शिव की आराधना करने से आध्यात्मिक शांति, सुख-समृद्धि तथा सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति की मान्यता है।

Frequently Asked Questions

नाग पंचमी 2026 17 अगस्त 2026 (सोमवार) को मनाई जाएगी।
पूजा का शुभ समय 17 अगस्त 2026 सुबह 05:51 बजे से 08:29 बजे तक है।
स्नान के बाद संकल्प लें, नाग पंचमी पूजा सामग्री से पूजा करें, नाग पंचमी मंत्र का जाप करें और आरती करें।
शिव और नाग देवता की पूजा करें, सात्विक भोजन करें। जमीन की खुदाई, हिंसा और तामसिक भोजन से बचें।
यह पर्व भगवान शिव, शेषनाग और नाग देवताओं की आराधना का प्रतीक है तथा प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है।
धार्मिक परंपरा में दूध अर्पित करने की मान्यता है। वैज्ञानिक दृष्टि से साँप दूध नहीं पीते, इसलिए जीवित साँपों को दूध पिलाने के बजाय प्रतीकात्मक रूप से पूजा करना और वन्यजीवों की सुरक्षा का सम्मान करना अधिक उचित माना जाता है।
भगवान शिव का रुद्राभिषेक करें, "ॐ नमः शिवाय" एवं नाग पंचमी मंत्र का जाप करें, नाग देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा करें और दान-पुण्य करें। ज्योतिषीय उपायों का प्रभाव व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

By Manjeet Kumar
Vedic Meet Content Team

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